गुजरात चुनाव : फिर फिसले राहुल गाँधी , भाषण में कहा कुछ ऐसा की हुए ट्रोल

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rahul gandhi tongue again slipped

कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी आये दिन जनता का मजाक बने रहते हैं और एक बार राहुल ने जनता को यह मौका दे दिया हैं और यह हुआ गुजरात प्रचार के दौरान पारदी में , जहाँ राहुल एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे |

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दुर्योधन को कहा दुर्योधन जी –

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बीजेपी की सरकार को घेरने के लिए महाभारत की कहानी सुनाई और महाभारत की कहानी के विलेन दुर्योधन को दुर्योधन जी कह कर संबोधित किया जिसके बाद से राहुल गांधी की समझ को लेकर एक बार फिर से सवाल उठने लगे है। राहुल ने कहा कि महाभारत की लड़ाई से पहले कृष्णजी दुर्योधनजी से मिलने गए थे। तब कृष्ण जी ने कहा कि लड़ाई नहीं होनी चाहिए, बस पांच गांव चाहिए। लेकिन दुर्योधन जी के पास शक्ति थी, पैसा था उन्होंने कहा कि मैं पांडवों को सुई की नोंक जितनी भी जमीन नहीं दूंगा। गुजरात चुनाव में भी ऐसा है एक तरफ गुजरात की जनता है और दूसरी चरफ 4-5 उद्योगपति हैं।

सूट बूट वाले हैं बीजेपी के दोस्त – राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि गुजरात का सच और बीजेपी का सच दो अलग-अलग चीजें हैं। बीजेपी का सच सूट-बूट वालों से दोस्ती है। बेरोजगारी, किसानों का दर्द, महंगी शि‍क्षा, भ्रष्टाचार, पाटीदार युवाओं और उना के दलितों पर बरसने वाली लाठी गुजरात का सच है, जिससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है। राहुल गांधी की महाभारत की इस कहानी के बाद बीजेपी नेता राहुल की भारतीय संस्कृति की समझ पर सवाल उठा रहे हैं।

सुनाई महाभारत की कहानी –

शुक्रवार को राहुल गांधी ने पारदी में एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बीजेपी पर निशाना साधने के लिए टाटा घराने को दिये कर्ज व महाभारत की कहानी का जिक्र किया। पूरे देश में कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा चलाया, लाखों लोगों की उससे जिंदगी बदल गई। उतना ही पैसा गुजरात में सरकार ने एक कंपनी को दे दिया। लेकिन, उस पैसे से न किसी को न रोजगार मिला और न ही गाड़ी बनी। राहुल गांधी ने कहा कि पूरा का पूरा काम चार-पांच कंपनियों के लिए होता है। यह सच्चाई और झूठ के बीच की लड़ाई है। राहुल गांधी ने कहा कि महाभारत की लड़ाई से पहले दुर्योधन जी, अर्जुन जी और कृष्ण जी से मिलने गए, कृष्ण जी के पैरो के पास अर्जुन जी बैठे थे। कृष्णजी ने दुर्योधन से कहा लड़ाई नहीं होनी चाहिए, पांडवों को सिर्फ पांच गांव चाहिए।

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