एक और बैंक घोटाला, 14 बैंको से एक हजार करोड़ लेकर विदेश भागा कारोबारी

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Another bank scam of 1000 crores

देश में आजकल बैंको से पैसा लेकर भागना एक फैशन बन चुका है और अमीर कारोबारियों ने तो इसे अपना पेशा सा बना लिया है | जहाँ ललित मोदी और विजय माल्या जैसे लोग पकड़ में नहीं आ रही तो वही नीरव मोदी और मेहुल चौकसी भी दस हजार करोड़ रुपये लेकर देश से भाग गए तो अब एक नया बैंक घोटाला सामने आया है |

Another bank scam of 1000 crores

ज्वेलरी से जुड़ा है नया घोटाला –

नया मामला ज्वेलरी कारोबार से जुड़ा है। चेन्नई स्थित ज्वेलरी कंपनी के मालिक ने एक साथ 14 बैंकों को एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई और बाद में विदेश फरार हो गया है। अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। हालांकि अभी तक किसी तरह की कोई एफआईआर फिलहाल दर्ज नहीं की गई है। जानकारी के मुताबिक कनिष्क गोल्ड का रजिस्टर्ड ऑफिस तमिलनाडु के चेन्नई में है। इसके प्रोमोटर्स और डायरेक्टर्स भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन है।

बैंकर्स का ये जवाब –

बैंकर्स का कहना है कि इन दोनों से पिछले कुछ समय से संपर्क नहीं हो सका है। बैंकों का मानना है कि दोनों इस वक्त मॉरिशस में रहते हैं। अधिकारियों का कहना है कि कनिष्क गोल्ड को 824 करोड़ रुपये का लोन दिया गया था। ब्याज और अन्य शुल्क लगाकर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होने का अंदेशा है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के अनुसार, एसबीआई ने 11 नवंबर, 2017 में कंपनी के खाते को फर्जी करार दिया था।

आरबीआई को भी इसकी जानकारी दे दी गई थी। बाद में अन्य बैंकों ने भी ऐसी ही घोषणा की थी। एसबीआई ने इस कंपनी को वर्ष 2007 से ही कर्ज देना शुरू किया था। बाद में एक कंसोर्टियम बना दिया गया था, ताकि अन्य बैंक भी कनिष्क गोल्ड को लोन दे सके।

चौकीदार को विपक्ष ने घेरा –

जाहिर है की विजय माल्या जब देश का पैसा लेकर भागे थे उस समय कांग्रेस की सरकार थी और नरेन्द्र मोदी ने खुद को चौकीदार बताकर जनता से वोट मागा था और कहा था की आप प्रधानमंत्री नहीं चौकीदार चुनिए | उनके इस बयान को लेकर विपक्ष लगातार उन्हें घेर रहा है और सोते हुए चौकीदार की उलाहना दे रहा है | काला धन भारत लाने की बात करने वाली मोदी सरकार के राज में लगातार एक के बाद एक बैंक घोटाले सामने आ रहे है | विजय माल्या से लेकर नीरव मोदी ने देश पैसा खाया और चम्पत हो गए लेकिन सरकार इसके बारे में कुछ नहीं बोल रही है | जाहिर है की कुछ दिन पहले आरबीआई ने लैटर आफ अंडरटेकिंग पर रोक दी थी और कहा था की इसके बाद देश में काफी हद तक लोन देने और लेने में पारदर्शिता सामने आएगी लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है |

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