यूपी में नोटबंदी के बाद भी फीकी नहीं पडी भाजपा की चमक.

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BJP in UP is not lying pale glow even after Notbandi

उत्तर प्रदेश आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्रदेश हैं.  यूपी में कभी भी चुनावों का आगमन हो सकता हैं. इसके लिए सभी पार्टियाँ तैयारी भी कर रही हैं. ये विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसका एक कारण यह है कि लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी थी. दूसरा नोटबंदी के बाद होने वाले सबसे बड़े चुनाव उत्तर प्रदेश के ही होंगे.

अमित शाह पहले ही बोल चुके है कि नोट बंदी के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश चुनावों और बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी. आपको याद दिला दें कि विभिन्न माध्यमों से नोटबंदी से पहले किये गये चुनावी पोल में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर सामने आयी थी.

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क्यूँ हैं बीजेपी अधिक लोकप्रिय

बीजेपी पार्टी के कार्यकर्ताओं की सोशल मीडिया पर सक्रियता से हम सभी वाकिफ हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी सभी सोशल प्लातेफ़ोर्म को और अधिल प्रभावी तरीके से यूज़ करने की तैयारी कर रही हैं. बीजेपी का आईटी सेल बहुत ही आक्रामक तरीके से विरोधियों पर आक्रमण करता हैं.  बीजेपी फेसबुक के जरिये माध्यम वर्गीय मतदाताओं तक पहुचना चाहती हैं. और काफी हद तक बीजेपी के आईटी सेल ने इसमें कामयाबी भी हासिल की हैं.

सर्जिकल स्ट्राइक का भी है असर

नरेंद्र मोदी द्वारा पकिस्तान में घुस कर किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के समय भाजपा की लोकप्रियता चरम पर पहुँच गयी थी. इसका फायदा बीजेपी को मिलना तय था लेकिन नोटबंदी के बाद बीजेपी की लोकप्रियता उतार देखने में आया. हालाँकि बीजेपी के प्रदेश प्रभारी सहित सभी कार्यकर्त्ता नोटबंदी को आम जनता के पक्ष में किया गया फैसला साबित करने में लगे हुए हैं.

सपा की कलह का भी मिलेगा फायदा

सपा के भीतर चल रहे झगड़े का सीधा सीधा फायदा अगर किसी पार्टी को होया देख रझा है तो वो बसपा से अधिक बीजेपी हैं. बसपा केवल सपा के मुस्लिम मतदाताओं को हासिल कर सकेगी. लेकिन भाजपा सभी वर्गों के मतदाताओं को रिझाने में जुटी हुई हैं. बसपा के पारम्परिक दलित वोट बैंक को भी केशव प्रसाद मोर्य के द्वारा बीजेपी अपने पक्ष में करने में जुटी हुई हैं.

नोटबंदी के बाद की स्थिति

नोटबंदी से आम आदमी दुखी तो हुआ हैं लेकिन अधिकतर लोगों ने नोटबंदी पर प्रधानमंत्री को सपोर्ट भी दिया हैं. नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री की छवि ईमानदार नेता की ही बनी हैं. इसका एक कारण कमज़ोर विपक्षी आक्रमण होना भी है.

कारण कुछ भी हो भाजपा सुर्ख़ियों में अपनी जगह बनाने में सफल रही हैं.

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