चुनाव आयोग से पहले तारीख बताने पर फसे मालवीय ने दी सफाई, नकवी ने कांग्रेस पर लगाया आरोप

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भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय के एक ट्वीट से आज राजनीतिक गलियारों में हंगामा खड़ा हो गया। इसके साथ ही एक बार फिर राजनीतिक दलों ने भारतीय चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को सवालों में घेर दिया। दरअसल,  आज चुनाव आयोग ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव का शेड्यूल जारी किया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से घोषणा करने से पहले ही अमित मालवीय ने ट्वीट कर दिया। जिस पर वो बुरे फंसे। ट्विटर पर जब उनसे सवाल पूछे जाने लगे तो उन्होंने ट्वीट हटा दिया। हालांकि अब उन्होंने इस पूरे मामले पर सफाई दी है।

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चैनल से ली जानकारी –

मालवीय ने चुनाव आयोग को लिखे एक पत्र में कहा है कि समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने 11.06 बजे सूचना दी थी। उन्होंने कहा कि ट्विटर पर उनकी ओर से जानकारी चैनल के प्रसार के दो मिनट बाद दी गई थी। मालवीय ने अपने पक्ष को सही साबित करने के लिए भी संलग्न किया कि उनके ट्वीट को खबर के दो मिनट बाद पोस्ट किया गया था। इसके अलावा, उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस के प्रभारी सोशल मीडिया द्वारा इसी तरह के एक ट्वीट को भी संलग्न किया है, जिसने ऐसी ही जानकारी दी थी। मालवीय ने यह भी कहा कि जैसा कि अब स्पष्ट है, चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम तिथियां अलग-अलग चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक थीं, जो मेरे ट्वीट के लिए जानकारी का एकमात्र स्रोत था। अपनी चिट्ठी में मालवीय ने कहा है कि मैं यह दोहराना चाहता हूं कि मैं देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग के अनन्य संवैधानिक क्षेत्र में विश्वास करता हूं। मेरे ट्वीट से चुनाव आयोग के संवैधानिक जनादेश का उल्लंघन करने का कोई इरादा नहीं था।

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नकवी ने रखा पक्ष –

चुनाव आयोग में अधिकारियों से मुलाकात के बाद मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘अमित मालवीय का ट्वीट एक टीवी चैनल के सोर्स पर आधारित था। चुनाव आयोग के कद को कमजोर करने का उनका कोई इरादा नहीं था। कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता ने भी अपने ट्वीट में यही बात बताई। हम यह मानते हैं कि अमित मालवीय को इस तरह का ट्वीट नहीं करना चाहिए था।’

चुनाव आयोग को चुनौती – कांग्रेस

इसे लेकर कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘भाजपा ने चुनाव आयोग से पहले ही कर्नाटक के चुनावों की तारीखों का ऐलान किया। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को ये सीधी चुनौती है। प्रश्न यह है- 1.क्या संवैधानिक संस्थाओं का डेटा भी भाजपा चुरा रही है? 2. क्या चुनाव आयोग अमित शाह को नोटिस देगा और भाजपा के IT सेल पर FIR दर्ज करवाएगा?’

जाहिर है की ये मामला सुबह से ही गरमाया हुआ है |

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