पनीरसेल्वम को इन कारणों से मिला तमिनाडु का मुख्यमंत्री पद.

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जयललिता के निधन के दो घंटों के भीतर ही उनका उत्तराधिकारी चुन लिया गया. ओ पनीरसेल्वम ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. ये पहले से ही अनुमानित था कि ओ पनीरसेल्वम को ही जयललिता के राजनितिक उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकारा जाना है. इससे पहले भी दो बार  65 साल के पनीरसेल्वम तमिलनाडु मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

jayalalithaa's last journey

जानिए आखिर क्यूँ मिला पनीरसेल्वम को यह पद.

जयललिता के साथ बने रहे वफादार

पनीरसेल्वम की पहचान जयललिता के ‘भक्त’ के रूप में है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान पनीरसेल्वम कुर्सी पर जयललिता की फोटो रखकर मुख्यमंत्री के कार्य भार सँभालते थे. इस कारण उनकी तुलना भगवान् राम के भाई  “भरत” की जाने लगी.

पनीरसेल्वम अपनी जेब में भी जयललिता की तस्वीर रखते हैं.  शपथ लेते समय भी उन्होंने अपनी जेब जयललिता की फोटो रखी हुई थी.  शपथ लेते समय भी इनकी आँखों में आंसू थे और रुंधे गले से पनीरसेल्वम ने शपथ ली.

दो बार पहले भी ली ये जिम्मेदारी

पनीरसेल्वम 2 बार तमिलनाडु के सीएम रह चुके हैं. 29 सितंबर 2014 को दोबारा मुख्यमंत्री बने पनीरसेल्वम ने 22 मई 2015 तक पद संभाला.  जयललिता के अस्पताल में भर्ती होने के बाद से पनीरसेल्वम ही पार्टी और सरकार का कामकाज देख रहे हैं. इस दौरान  पनीरसेल्वम कैबिनेट की  बैठकोण  में जयललिता की तस्वीर रखकर सभी जरूरी निर्णय लेते थे.

पनीरसेल्वम  राजनीति में आने से पहले वह खेती करते थे. नगरपलिका का चुनाव जीतकर पनीरसेल्वम राजनिति में आये थे. पनीरसेल्वम थेवर समुदाय से आते है. इस समुदाय ने  जयललिता की पार्टी को लोगों तक पहुचाने में काफी योदान दिया है.

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