इन विधानसभा चुनावों में सख्त होंगे चुनाव आयोग के नियम.

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इन विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने राजनेतिक दलों के लिए कड़े नियम लागू किये हैं. प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद अब जगह जगह लगे विभिन्न पार्टियों के पोस्टर्स और होर्डिंग्स उतरने शुरू हो गये हैं. चुनाव आयोग को और से ये निर्देश भी आये हैं कि  यदि कोई उम्मीदवार आयोग के नियमों की अवहेलना करता हैं तो उसके खिलाफ एक्शन भी लिया जा सकता हैं. चुनाव आयोग ने इस बार चुनावों में राजनेतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों को भी शामिल किया हैं.

EC broke silence on SP controversy

चुनावी खर्चे पर होगी नज़र

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में प्रत्याशियों को चुनावी खर्चे के लिए केवल 28 लाख रूपये खर्च करने की अनुमति दी हैं. इससे अधिक के खर्चे किये जाने पर चुनाव आयोग प्रत्याशी की आय की जाँच करा सकता हैं. प्रत्याशियों के चुनावी खर्चों पर नज़र रखने के लिए निर्वाचन व्यय अनुश्रवण प्रणाली लागू की गयी हैं. इसमें केन्द्रीय कर्मचारियों को निर्वाचन व्यय प्रेक्षक और सहायक निर्वाचन व्यय प्रेक्षक नियुक्त किया गया हैं.

चुनावी खर्चों के लिए खोलना होगा अकाउंट

चुनावी खर्चों पर नज़र रखने के लिए इन चुनावों में चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों से चुनाव में होने वाले खर्चों के लिए अलग बैंक अकाउंट खोलने के लिए कहा  है. ऐसा करने से चुनाव आयोग प्रत्याशियों द्वारा किये गये खर्चों का हिसाब आसानी से रख सकता हैं.

प्रचार में सरकारी वाहनों और हेलीकॉप्टरों का प्रयोग नहीं होगा

आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी पार्टी के पदाधिकारी प्रचार के लिए अपने दौरों के दौरान अब सरकारी गेस्ट हाउस का प्रयोग नहीं कर पायेंगे. साथ ही सरकारी वाहनों व हेलीकॉप्टरों आदि का प्रयोग भी प्रत्याशी और मंत्री अपने चुनावी दौरों के लिए नहीं कर पायेंगे.

चुनावी घोषणा पत्र में नहीं कर सकेंगे खोखले वादें

इस बार के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने पार्टियों के चुनावी घोषणा पत्र पर भी कड़ी नज़र रखेगा. ऐसा पहली बार होगा कि पार्टी के घोषणा पत्र को भी आचार संहिता में शमिल किया जायेगा. इस बार राजनेतिक पार्टियों को अपने घोषणा पात्र की एक प्रति चुनाव आयोग भी भेजनी होगी. ऐसा करने के पीछे चुनाव आयोग का मुख्य मकसद केवल मतदाताओं को लुभाने के लिए किये गये वायदों पर नज़र रखना हैं.

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